वैन (नेहा मेहता कुरुक्षेत्र-हरियाणा) :: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्मसरोवर एक ऐसा तालाब है जो कि थानेसर का एक पवित्र जलाशय है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कुरुक्षेत्र को भगवान ब्रह्मा द्वारा विशाल यज्ञ से निर्मित किया गया था। यहां एक शिव का मंदिर भी है, जिस पर एक पुल के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। नवंबर में गीता जयंती महोत्सव के दौरान इस सरोवर की सुन्दरता में चार चाँद लग जाते हैं। हर वर्ष दिसंबर के शुरू में यहां दीपदान का आयोजन किया जाता है। इस तालाब में पानी में जलते हुए दीपकों को पाया जाता है और कहा जाता है कि इस कुंड में डुबकी लगाने से उतना ही पुण्य प्राप्त होता है जितना पुण्य अश्वमेघ यज्ञ करने के बाद मिलता था। "था" इसलिए क्योंकि आजकल इस यज्ञ का जिक्र कम ही सुनाई देता है। यह तालाब 18 फीट लंबा 14 फीट चौड़ा और 15 फीट गहरा है जो कि एशिया में सबसे बड़ा सरोवर है। इस कुंड में स्नान करने के लिए सूर्य ग्रहण और गीता जयंती के दौरान काफी भीड़ देखने को मिलती है। नवंबर और दिसंबर में खासतौर पर यहां भीड़ देखने को मिलती है और ऐसा भी कहा जाता है इन दोनों माह में प्रवासी पक्षी भारी संख्या में यहां आते हैं। इस तालाब की विशेषता ना सिर्फ हरियाणा प्रांत में बल्कि विश्व भर में प्रसिद्ध है गीता महोत्सव के चलते यहां देश-विदेश से लोग आते हैं और यहां पर प्रदर्शनी तथा नुक्कड़-नाटकों के साथ-साथ कई विशेष कार्यक्रमों का लुत्फ उठाते हैं। यह महोत्सव एक महोत्सव नहीं बल्कि इसे उत्सव की तरह मनाया जाता है। जहां हर प्रांत की छवि, पहनावा, साज-सज्जा और हर प्रांत की संस्कृति ब्रह्मसरोवर के इस प्रांगण में देखने को मिलती है।
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